ki likhiyaa kise mukkadar c
hathan diyaan chaar lakiraan da
me dard nu kaba keh baitha
te rabb naam rakh baitha peedha da
ਕੀ ਲਿਖਿਆ ਕਿਸੇ ਮੁਕੱਦਰ ਸੀ
ਹੱਥਾਂ ਦੀਆਂ ਚਾਰ ਲਕੀਰਾਂ ਦਾ
ਮੈਂ ਦਰਦ ਨੂੰ ਕਾਬਾ ਕਹਿ ਬੈਠਾ
ਤੇ ਰੱਭ ਨਾਮ ਰੱਖ ਬੈਠਾਂ ਪੀੜਾਂ ਦਾ
ki likhiyaa kise mukkadar c
hathan diyaan chaar lakiraan da
me dard nu kaba keh baitha
te rabb naam rakh baitha peedha da
ਕੀ ਲਿਖਿਆ ਕਿਸੇ ਮੁਕੱਦਰ ਸੀ
ਹੱਥਾਂ ਦੀਆਂ ਚਾਰ ਲਕੀਰਾਂ ਦਾ
ਮੈਂ ਦਰਦ ਨੂੰ ਕਾਬਾ ਕਹਿ ਬੈਠਾ
ਤੇ ਰੱਭ ਨਾਮ ਰੱਖ ਬੈਠਾਂ ਪੀੜਾਂ ਦਾ
जिसने भी किया है कुछ बड़ा वो कभी किसी से नहीं डराI
अगर आप खुद ही खुद पर भरोशा नहीं करोगे तो कोई और क्यों और करेगा I”
कठोर परिश्रम कभी भी विफल नहीं होता ।”
उम्मीद और विश्वास का छोटा सा बीज, खुशियों के विशाल फलों से बेहतर और शक्तिशाली है ।”
दूर से ही हाथ हिला के चला जाऊंगा।
मैं तुमसे नजरे मिला के चला जाऊंगा।
नजरअंदाज कर देना ज़माने की तरह तुम भी,
नशे में हूं चिल्लाऊंगा चिल्ला के चला जाऊंगा।
हर वजह खत्म कर दूंगा मैं अपने लौटने की,
मत सोचना कि उम्मीद दिला के चला जाऊंगा।
मिटा दूंगा हर एक निशानी मोहब्बत की,
मैं अपना आशियाना जला के चला जाऊंगा।
जिसकी खुशबू से महक उठे सारा जमाना,
मैं वो फूल चमन में, खिला के चला जाऊंगा।
याद रखो न रखो, फ़ैसला तुम्हारा है “शिवम”
मैं इक बार चेहरा, दिखला के चला जाऊंगा।
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