
Ji rahi hun thod koi na..!!
Teri deed vichon mile jhaka rabb da
Ke mandiran di lod koi na..!!

मेरे हिस्से आई अब तक कोई सुबह या शाम नही!
मैं उसकी दीवाना हूँ और एक पल को आराम नही!
सुबह सवाली बन जाती है रात डराती है मुझकों!
याद उसे करती हूँ केवल और मुझे कुछ काम नही!!
हर्ष ✍️
कोई बुतखाने में तो कोई महखाने में सच्चे होते है….
लोग वो है जो जबान के पक्के होते है….
वो महीने भर से भूखी है, खुदा पाने के लिए,
हमारे लिए जिसके पांव के बिच्छु ही मक्के होते है….
मुक्कमल हो इश्क तो बिस्तर पर खत्म हो जाता है,
इसलिए इश्क, रास्ते और किस्से अधूरे ही अच्छे होते है….
हर्ष✍️