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Raste par unhe pukarte dekha hai || Hindi shayari || love shayari

Raste par unhe pukarte logo ko maine dekha hai,
Khidki se unhe zulfe sawarte mene dekha hai
Shayad unhe khabar hai unhe meri nazar lagi hai
Unhe aayine pe apna sadka utarne mene dekha hai…❤️

रास्तों पर उन्हें पुकारते लोगो को मैंने देखा है,
खिड़की से उन्हें जुल्फें संवारते मैंने देखा है,
शायद उन्हें खबर है उन्हे मेरी नज़र लगी है,
उन्हें आईने पे अपना सदका उतरते मैंने देखा है…❤️

Title: Raste par unhe pukarte dekha hai || Hindi shayari || love shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


ईश्वर अच्छा ही करता है || akbar story

बीरबल एक ईमानदार तथा धर्म-प्रिय व्यक्ति था। वह प्रतिदिन ईश्वर की आराधना बिना-नागा किया करता था। इससे उसे नैतिक व मानसिक बल प्राप्त होता था। वह अक्सर कहा करता था कि “ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है, कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि ईश्वर हम पर कृपादृष्टि नहीं रखता, लेकिन ऐसा होता नहीं। कभी-कभी तो उसके वरदान को भी लोग शाप समझने की भूल कर बैठते हैं। वह हमको थोड़ी पीड़ा इसलिए देता है ताकि बड़ी पीड़ा से बच सकें।”

एक दरबारी को बीरबल की ऐसी बातें पसंद न आती थीं। एक दिन वही दरबारी दरबार में बीरबल को संबोधित करता हुआ बोला, ‘‘देखो, ईश्वर ने मेरे साथ क्या किया। कल शाम को जब मैं जानवरों के लिए चारा काट रहा था तो अचानक मेरी छोटी उंगली कट गई। क्या अब भी तुम यही कहोगे कि ईश्वर ने मेरे लिए यह अच्छा किया है ?’’

कुछ देर चुप रहने के बाद बोला बीरबल, ‘‘मेरा अब भी यही विश्वास है क्योंकि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है।’’

सुनकर वह दरबारी नाराज हो गया कि मेरी तो उंगली कट गई और बीरबल को इसमें भी अच्छाई नजर आ रही है। मेरी पीड़ा तो जैसे कुछ भी नहीं। कुछ अन्य दरबारियों ने भी उसके सुर में सुर मिलाया।

तभी बीच में हस्तक्षेप करते हुए बादशाह अकबर बोले, ‘‘बीरबल हम भी अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, लेकिन यहां तुम्हारी बात से सहमत नहीं। इस दरबारी के मामले में ऐसी कोई बात नहीं दिखाई देती जिसके लिए उसकी तारीफ की जाए।’’

बीरबल मुस्कराता हुआ बोला, ’’ठीक है जहांपनाह, समय ही बताएगा अब।’’

तीन महीने बीत चुके थे। वह दरबारी, जिसकी उंगली कट गई थी, घने जंगल में शिकार खेलने निकला हुआ था। एक हिरन का पीछा करते वह भटककर आदिवासियों के हाथों में जा पड़ा। वे आदिवासी अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि में विश्वास रखते थे। अतः वे उस दरबारी को पकड़कर मंदिर में ले गए, बलि चढ़ाने के लिए। लेकिन जब पुजारी ने उसके शरीर का निरीक्षण किया तो हाथ की एक उंगली कम पाई।

‘‘नहीं, इस आदमी की बलि नहीं दी जा सकती।’’ मंदिर का पुजारी बोला, ‘‘यदि नौ उंगलियों वाले इस आदमी को बलि चढ़ा दिया गया तो हमारे देवता बजाय प्रसन्न होने के क्रोधित हो जाएंगे, अधूरी बलि उन्हें पसंद नहीं। हमें महामारियों, बाढ़ या सूखे का प्रकोप झेलना पड़ सकता है। इसलिए इसे छोड़ देना ही ठीक होगा।’’

और उस दरबारी को मुक्त कर दिया गया।

अगले दिन वह दरबारी दरबार में बीरबल के पास आकर रोने लगा।

तभी बादशाह भी दरबार में आ पहुंचे और उस दरबारी को बीरबल के सामने रोता देखकर हैरान रह गए।

‘‘तुम्हें क्या हुआ, रो क्यों रहे हो ?’’ अकबर ने सवाल किया।

जवाब में उस दरबारी ने अपनी आपबीती विस्तार से कह सुनाई। वह बोला, ‘‘अब मुझे विश्वास हो गया है कि ईश्वर जो कुछ भी करता है, मनुष्य के भले के लिए ही करता है। यदि मेरी उंगली न कटी होती तो निश्चित ही आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसीलिए मैं रो रहा हूं, लेकिन ये आंसू खुशी के हैं। मैं खुश हूं क्योंकि मैं जिन्दा हूं। बीरबल के ईश्वर पर विश्वास को संदेह की दृष्टि से देखना मेरी भूल थी।’’

अकबर ने मंद-मंद मुस्कराते हुए दरबारियों की ओर देखा, जो सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे। अकबर को गर्व महसूस हो रहा था कि बीरबल जैसा बुद्धिमान उसके दरबारियों में से एक है।

Title: ईश्वर अच्छा ही करता है || akbar story


Life is chess || punjabi zindagi shayari

ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਖਿਡਾਰੀ ਆ ਹਾਰ ਛੇਤੀ ਨਹੀਂ ਮੰਦੇ,
ਧਰਤੀ ਉਤੇ ਆਏ ਆ ਕੁੱਝ ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਜਾਵਾਗੇ।
ਗੱਦਾਰੀਆਂ ਜੋ ਵਾਪਰਿਆਂ ਨਾਲ ਮੇਰੇ ਰੱਬ ਆਪੇ ਜ਼ੁਰਮਾਨਾ ਦੇਦੂਗਾ,
ਉਸਤਾਦ ਬਣੀ ਹੋਈ ਦੁਨੀਆਂ ਅਫਵਾਹ ਬਣੋਨ ਵਿਚ ਤਾਹੀਉਂ ਆਵਦੇ ਬਾਰੇ ਘੱਟ ਹੀ ਬੋਲੀਦਾ।

ਅੱਧੇ ਨਮਕ ਖਾਣ ਵਾਲੇ ਹੀ ਪਿੱਠ ਤੇਰੀ ਛੁਰਾ ਮਾਰਨ ਨੂੰ ਫਿਰਦੇ ਆ,
ਇਹ ਤਾਹ ਸਮਾਂ ਹੀ ਦਸੁਗਾ ਬੰਦਿਆ ਕਿੰਨੇ ਤੇਰੇ ਪੁੰਨ ਤੇ ਕਿੰਨੇ ਪਾਪ ਨੇ।
ਹਰੇਕ ਕਰਮ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਤਾਹ ਇਥੇ ਜਿਉਂਦੇ ਹੋਏ ਹੋ ਹੀ  ਜਾਣਾ ਏ,
ਜੇ ਚੰਗਾ ਕਰੇਗਾ ਤਾਂ ਸਵਰਗ ਮਿਲੇਗਾ ਜੇ ਮਾੜਾ ਕਰੇਗਾ ਨਰਕ ਜਾਏਗਾ।

ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਇਨਸਾਨ ਨੇ ਕਇਆਂ ਦੀ ਜ਼ਮੀਰਾਂ ਖਤਮ ਨੇ ਤੇ ਕਇਆਂ ਦੀ ਅਕਲਾਂ ਨੇ,
ਸੱਭ ਇਕ ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਥੱਲੇ ਲਾਉਣ ਪਿੱਛੇ ਆਵਦੇ ਸਿਰਾਂ ਉਤੇ ਕਰਜੇ ਚੁੱਕੀ ਜਾ ਰਹੇ।
ਹੁੰਦੀਆਂ ਨੇ ਚਲਾਕੀਆਂ ਤਾਂ ਹੋਣ ਦੇ ਮੁੜ ਜਵਾਬ ਦੀ ਫਿਦਰਤ ਨਾ ਕਰਿ,
ਕਾਇਨਾਤ ਨੇ ਆਪੇ ਤੇਰੀ ਬਾਹ ਫੜ੍ਹਕੇ ਸਾਥ ਪੂਰਾ ਨਿਭੋਣਾ ਤੂੰ ਯਕੀਨ ਰੱਖੀ।
ਕਮਾਈਆਂ ਕਰਕੇ ਤੂੰ ਹੰਕਾਰ ਵਿਚ ਨਾ ਆਈ ਬਾਜ਼ੀ ਪਲਟ ਵੀ ਜਾਂਦੀ,
ਕਦੀ ਰਾਜੇ ਤੋਂ ਰੰਕ ਤੇ ਰੰਕ ਰਾਜੇ ਹੋਣੇ ਵਿਚ ਦੇਰ ਨਹੀਂ ਲੱਗਦੀ।
ਕਾਲੇ ਚਿੱਟੇ ਖ਼ਾਨੇ ਸ਼ਤਰੰਜ ਦੇ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦਿਲ ਨੇ,
ਕਿਹੜਾ ਸਾਫ ਦਿਲ ਦਾ ਤੇ ਕਿਹੜਾ ਕਾਲੇ ਦਿਲ ਦਾ ਕੁੱਝ ਪਤਾ ਹੀ  ਨਹੀਂ ਲੱਗਦਾ।

ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਆ ਕੋਈ ਬਾਜ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜੋ ਇਮਤਿਹਾਨ ਵਾਂਗੂ ਟ੍ਰਾਫੀ ਮਿਲਜਾਉਗੀ
ਖਾਲੀ ਆਏ ਸੀ ਤੇ ਖਾਲੀ ਹੀ ਚਲ ਜਾਣਾ ਕਾਦਾ ਮਾਨ ਆ ਮਹਿਤੇਯਾ ਸੱਭ ਇਥੇ ਮੁੱਕ ਜਾਣਾ
ਹੁਣ ਚੱਲ ਪਿਆ ਮੈ ਰੱਬ ਦੇ ਦਰਵਾਜੇ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਰੁਕੂਗਾ
ਕਿਸੇ ਦੀ ਮਜ਼ਾਲ ਨਹੀਂ ਮੈਨੂੰ ਰੋਕ ਲਵੂਗਾ ਖਤ੍ਰੀ ਆ ਤਾਂ ਮੁਸੀਬਤਾਂ ਨਾਲ ਖੇਡਣਾ ਪੁਰਾਣਾ ਸ਼ੌਂਕ ਏ ਸਾਡਾ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਆ ਪਿਆਰੇ ਕੋਈ ਸ਼ਤਰੰਜ ਦੀ ਬਾਜ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜੋ ਆਵਦੀ ਮਰਜ਼ੀ ਨਾਲ ਚਲਾ ਲਾਂਗੇ ਇਹ ਤਾਂ ਰੱਬ ਹੀ ਦਸੁਗਾ ਕੌਣ ਰਾਜਾ ਤੇ ਰਾਣੀ ਆ।

Title: Life is chess || punjabi zindagi shayari