rona taa saadde mukadraa vich hi si
aukaat to uchi mohobat jo kar baithaa hai
ਰੋਣਾ 🥺ਤਾ ਸਾਡੇ ਮੋਕਦਰਾ ਵਿਚ ਹੀ ਸੀ
ਔਕਾਤ ਤੋਹ ਉੱਚੀ ਮੋਹੱਬਤ ਜੋ ਕਰ ਬੈਠਾ ਹਾਂ 🙂
rona taa saadde mukadraa vich hi si
aukaat to uchi mohobat jo kar baithaa hai
ਰੋਣਾ 🥺ਤਾ ਸਾਡੇ ਮੋਕਦਰਾ ਵਿਚ ਹੀ ਸੀ
ਔਕਾਤ ਤੋਹ ਉੱਚੀ ਮੋਹੱਬਤ ਜੋ ਕਰ ਬੈਠਾ ਹਾਂ 🙂
ज़िन्दगी के लिए इक ख़ास सलीक़ा रखना
अपनी उम्मीद को हर हाल में ज़िन्दा रखना
उसने हर बार अँधेरे में जलाया ख़ुद को
उसकी आदत थी सरे-राह उजाला रखना
आप क्या समझेंगे परवाज़ किसे कहते हैं।
आपका शौक़ है पिंजरे में परिंदा रखना
बंद कमरे में बदल जाओगे इक दिन लोगो
मेरी मानो तो खुला कोई दरीचा रखना
क्या पता राख़ में ज़िन्दा हो कोई चिंगारी
जल्दबाज़ी में कभी पॉव न अपना रखना
वक्त अच्छा हो तो बन जाते हैं साथी लेकिन
वक़्त मुश्किल हो तो बस ख़ुद पे भरोसा रखना
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।