
Sadi rooh de vich dere tusa laye sajjna..!!

करवट बदलकर सोने की कोशिश की, नींद फिर भी ना आई..
रात कमरे में बस हम दोनो थे, मैं और मेरी तनहाई..
उसे पसंद नहीं मुझसे दूर जाना, और मैने कभी वो पास ना बुलाई..
आखिर में बैठकर बातें की उससे, और जान पहचान बढ़ाई..
उसने कहा साथ उसे अच्छा लगता है मेरा, पर मुझे वो रास न आई..
समझाया उसे दूर होजा मुझसे, इतनी सी बात भी उसे समझ ना आई..
आखिर में अपनाना पड़ा उसे, वो तो मुझे छोड़ ना पाई..
जब अपनाकर उसे, आंखें बंद की मैने, तब जाकर कहीं मुझे नींद आई….
कान्हा तेरी भक्ति में मीरा बन जाऊ
राम तेरी भक्ति में शबरी बन जाऊ
तूने जो ना चाहा ऐसा कर जाऊ
तेरी खातिर मैं खुदको वार जाऊ
अगर हो साथ तेरा तो ऐसा मकाम पाऊँ
तेरे लिए सारी दुनिया से लड़ जाऊ
तेरे आशीर्वाद से ही ये दुनिया संभली
मेरी गिरते जिंदगी को तूने थामली
उसमे खुशियाँ तूने ही डाली
तेरे होने से ही हो सारे काज पूरे
बिना तेरे लगे मायूसी और ज़िंदगी अधूरी