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Roop tha uska bahut || hindi poem

रूप था उसका बहुत विशाल, राक्षस था वो बहुत भारी..
नाम था दशानन उसका, बुद्धि न जिसकी किसी से हारी..
हर कोई डरता था उससे, हो देव, दैत्य, चाहे नर-नारी..
प्रकोप था जिसका लोकों में, धरती कांपती थी सारी..
देखके ताकत को उसकी, भागे खड़े पैर बड़े बाल-धारी..
विशाल साम्राज्य पर उसके, भारी पड़ गई बस एक नारी..
घमंड को उसके चूर कर दिया, कहा समझ ना तू निर्बल नारी..
विधवंश का तेरे समय आ गया, ले आ गयी देख तेरी बारी..
लंका में बचेगा ना जीव कोई, मति जो गई तेरी मारी..
आराध्य से मेरे दूर कर दिया, भुगतेगी तेरी पीढी सारी..
रघुनंदन आए कर सागर पार, आए संग वानर गदा धारी..
एक-एक कर सबको मोक्ष दिया, सियाराम चरण लागी दुनिया सारी..

Title: Roop tha uska bahut || hindi poem

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Patriotic Poems || hindi desh prem poems

देशभक्ति कविताएं

1.
हिन्दुस्थान
मुल्क है अपना।
विश्व दरबार में
वो एक सपना।

आसमान में उड़ती
मन की आशा।
लहरों में मचलती
दिल की परिभाषा।

वायु में घूमती
आज़ादी की साँस।
मिटटी में रहती
बलिदान की अहसास।

मेरा देशवासियों
अपना भाई और बहन की समान।
एक आंख में हिन्दू,
दूसरे में मुस्लमान।

प्यार का बंधन
आंधी में भी न टूटा।
हम सब एक है,
फर्क झूठा।

2.
केदार देख के
लगता है
जीते रहु तूफान में
अंतिम समय तक।

गंगा देख के
लगता है
बहते रहु बंधन में
अंतिम साँस तक।

खेत की हरियाली देख के
लगता है
युवा रहु उम्र में
अंतिम यात्रा तक।

थार देख के
लगता है
उड़ते रहु आंधी में
अंतिम कड़ी तक।

हिन्द महासागर देख के
लगता है
घूमते रहु घूर्णी में
अंतिम सूर्यास्त तक।

भारत माता को देख के
लगता है
खिलते रहु उनकी गोद में
अंतिम संस्कार तक।

Title: Patriotic Poems || hindi desh prem poems


Anjaan bante ho || love hindi shayari

Jante ho fir bhi anjan bnte ho 
Puchhte ho tumhe kya pasand hai
Jawab khud ho, fir bhi sawal krte ho!❤

जानते हो फिर भी अनजान बनते हो
पूछते हो तुम्हे क्या पसन्द है
जवाब खुद हो, फिर भी सवाल करते हो!❤

Title: Anjaan bante ho || love hindi shayari