Saadhi kadar uhna ton puchh ke vekh
jinna nu mudh ke nahi vekhiyaa asin tere lai
ਸਾਡੀ ਕਦਰ ਉਨ੍ਹਾ ਤੋ ਪੁਛ ਕੇ ਵੇਖ
ਜਿਨ੍ਹਾ ਨੂੰ ਮੁੜ ਕੇ ਨਹੀਂ ਵੇਖਿਆ ਅਸੀਂ ਤੇਰੇ ਲਈ
Saadhi kadar uhna ton puchh ke vekh
jinna nu mudh ke nahi vekhiyaa asin tere lai
ਸਾਡੀ ਕਦਰ ਉਨ੍ਹਾ ਤੋ ਪੁਛ ਕੇ ਵੇਖ
ਜਿਨ੍ਹਾ ਨੂੰ ਮੁੜ ਕੇ ਨਹੀਂ ਵੇਖਿਆ ਅਸੀਂ ਤੇਰੇ ਲਈ

इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?