
or sab karzo se bura mohobat ka karz hota hai
arey tu de le jitne zakhm dene hai mere dil ko
akhil pathro ko kha dard hota hai

asi khuli kitaab ban jawaange
tu padhan wala taa ban
asi tere har dhokhe diyaa majbooriyaa nu samajh jawange
tu samjaun wala taa ban
ਅਸੀਂ ਖੁਲਿ ਕਿਤਾਬ ਬਣ ਜਾਵਾਂਗੇ
ਤੂੰ ਪੜਣ ਵਾਲਾਂ ਤਾਂ ਬਣ
ਅਸੀਂ ਤੇਰੇ ਹਰ ਦੋਖੇ ਦੀਆਂ ਮਜ਼ਬੂਰੀਆਂ ਨੂੰ ਸਮਝ ਜਾਵਾਂਗੇ
ਤੂੰ ਸਮਝਾਉਣ ਵਾਲਾਂ ਤਾਂ ਬਣ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।