मुझे किस्मत से शिकवा तो नहीं लेकिन ऐ खुदा,
वो ज़िन्दगी में क्यों आया जो किस्मत में नहीं था।💔
मुझे किस्मत से शिकवा तो नहीं लेकिन ऐ खुदा,
वो ज़िन्दगी में क्यों आया जो किस्मत में नहीं था।💔
teri muhabbat bhee kiraaye ke ghar kee tarah thi,
kitna bhi sajaaya par meri nahin huee……
तेरी मुहब्बत भी किराये के घर की तरह थी,
कितना भी सजाया पर मेरी नहीं हुई……
दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला
अब इसे लोग समझते हैं गिरफ्तार मेरा
सख्त नदीम है मुझे दाम में लाने वाला
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे इस से
वो जो इक शख्स है मुंह फेर के जाने वाला
मुन्तज़िर किस का हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं
कौन आएगा यहाँ कौन है आने वाला
मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख्वाब की ताबीर बताने वाला