ajh kal dorriyaa ki wadh gaiyiaa saade vich
sadde haase v khamosh hunde jaa rahe ne
ਅੱਜ-ਕੱਲ੍ਹ ਦੂਰੀਆਂ ਕਿ ਵੱਧ ਗਈਆਂ ਸਾਡੇ ਵਿੱਚ,
ਸਾਡੇ ਹਾਸੇ ਵੀ ਖਾਮੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ।💯
ajh kal dorriyaa ki wadh gaiyiaa saade vich
sadde haase v khamosh hunde jaa rahe ne
ਅੱਜ-ਕੱਲ੍ਹ ਦੂਰੀਆਂ ਕਿ ਵੱਧ ਗਈਆਂ ਸਾਡੇ ਵਿੱਚ,
ਸਾਡੇ ਹਾਸੇ ਵੀ ਖਾਮੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ।💯
ख़िज़ाँ का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
किसे ख़बर थी बिछड़कर न मिल सकेंगे कभी
न ख़त्म होगा तेरे इन्तिज़ार का मौसम
ग़रज़ का दौर है सबको हैं अपनी अपनी धुन
किसी को रास न आया पुकार का मौसम
ढला है हुस्न तो मशहूर बेवफ़ाई हुई
गुज़र गया है तेरे इन्तिज़ार का मौसम
उड़ाए फिरती है आवारगी की आंधी हमें
हमें नसीब कहाँ ज़ुल्फ़-ए- यार का मौसम
बुझे हैं रेख़्ता हम तो बुझे नज़ारे हैं
उदास उदास लगा हुस्न -ए- यार का मौसम
हम रोशनी में बैठकर,सारी रात लिखते हैं
उस नक़ाव में हमको,दो चिराग़ दिखते हैं
तुझको अंदाज़ा भी नहीं होगा,के मेरे बगैर
तेरे पास बैठे लोग,कितने ख़राब दिखते हैं