सफर वही तक जहाँ तक तुम हो,
नज़र वही तक जहाँ तक तुम हो,
वैसे तो हज़ारों फूल खिलतें हैं गुलशन में मगर,
खुशबू वही तक जहाँ तक तुम हो।
सफर वही तक जहाँ तक तुम हो,
नज़र वही तक जहाँ तक तुम हो,
वैसे तो हज़ारों फूल खिलतें हैं गुलशन में मगर,
खुशबू वही तक जहाँ तक तुम हो।
ना जाने क्यो सोचते है…हर वख्त तेरे बारे में!
लगता है सोहबत में तेरी मुझे ईश्क होने लगा है!
देखते हो जब मुझे शरमा कर आंखे झुक जाती है,
हर अदा पर तेरा पहरा सा महसूस होने लगा है
देखूं जब भी आइना अक्स तेरा मुझमे दिखने लगा है
खोई रहती हूं , वख्त बेवख्त तेरे ख्यालो में
ओर दिल भी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा है
लगता है तू सोच में मेरी हावी होने लगा है
Zaroori nahi ke jajhbaat kalam naal hi likhe jaan
khali panne v bahut byaan kar jande ne
ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਜਜਬਾਤ ਕਲਮ ਨਾਲ ਹੀ ਲਿਖੇ ਜਾਣ,
ਖਾਲੀ ਪੰਨੇ ਵੀ ਬਹੁਤ ਕੁਝ ਬਿਆਨ ਕਰ ਜਾਂਦੇ ਨੇਂ