
Sajjna de didar di saza e ehna akhiya nu..!!

कब्र दर कब्र इक इश्तिहार जा रहा है,
अपना था कोई वो जो दूर जा रहा है,
मोहब्बत सही, इश्क सही, पास नहीं है अब,
जोगी इसी धुन में कोई गीत गा रहा है...
जो अपने थे वो चले गए....
हर वक्त आंसू पोंछने कोई पास आ रहा है,
मालूम है वो भी चला जायेगा फिर आंसू देकर,
जोगी इसी धुन में कोई गीत गा रहा है...
मतलबी, बेशर्म, बेईमान है दुनिया सारी
मालूम है की जीने नहीं देगी... देखो...
मेरी कब्र से भी मेरा इश्तिहार आ रहा है...
जोगी इसी धुन में कोई गीत गा रहा है...
ਰੂਹਾਂ ਵਾਲਾ ਗੀਤ ਜਦ ਆਬਸ਼ਾਰ ਗਾਉਣਗੇ
ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਬਿਤਾਏ ਦਿਨ ਬੜੇ ਯਾਦ ਆਉਣਗੇ
Roohan wala geet yad aabshaar gaunge
tere naal bitaae din bade yaad aung