
tujhe har pal yaad karna
meri bekhyali hi to hai
tha jhaa kehna whaa keh na paya
umar bhar kagjo par yun
shayari likhna #arsh ki bejhubani
hi to hai

काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
Kami nai c kise cheez di mainu par
ikalla baith baith royeaa han rataan nu bahut
sirf tere lai
ਕਮੀਂ ਨਈਂ ਸੀ ਕਿਸੇ ਚੀਜ਼ ਦੀ ਮੈਨੂੰ ਪਰ
ਇਕੱਲਾ ਬੈਠ ਬੈਠ ਰੋਇਆਂ ਹਾਂ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ ਬਹੁਤ
ਸਿਰਫ ਤੇਰੇ ਲਈ