
tujhe har pal yaad karna
meri bekhyali hi to hai
tha jhaa kehna whaa keh na paya
umar bhar kagjo par yun
shayari likhna #arsh ki bejhubani
hi to hai

वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।
Tapti huyi zameen hai jaldhaar bant ta hun
Patjhar ke raston par mein bhaar bant ta hun
Ye aag ka dariya hai jeena bhi bhut mushqil
Nafrat ke daur mein bhi mein pyar bant ta hun🙃❤️
तपती हुई ज़मीं है जलधार बाँटता हूँ
पतझर के रास्तों पर मैं बहार बाँटता हूँ
ये आग का दरिया है जीना भी बहुत मुश्क़िल
नफ़रत के दौर में भी मैं प्यार बाँटता हूँ🙃❤️