
Jehrre hasde ne ajh sunn shayari nu
kal bollan mereyaan nu tarsenge
jehrre langhde ne mooh vatt k ajh
shamshan ch oh mainu labhnge

Jehrre hasde ne ajh sunn shayari nu
kal bollan mereyaan nu tarsenge
jehrre langhde ne mooh vatt k ajh
shamshan ch oh mainu labhnge
मेरे साथ जब मैं खुद खड़ा होता हूँ
तब मैं क़यामत के हर तूफ़ान से
बड़ा होता हूँ !!
शाम बीती और रात हुई, गमों की फिर बरसात हुई..
तुझे भुलने को फिर से जाम पिया, गलती फिर मेरे हाथ हुई..
फिर से बहक गए लफ्ज मेरे, लफ्जों पे फिर से दात हुई..
दिलजले थे वहां कई मुझ जैसे, उनकी भी इश्क में मात हुई..
वही एक तरह का हर किस्सा, इश्क की भी भला कोई जात हुई..
हर कहानी ख़ुशी से शुरू हुई, ख़तम आंसुओं के साथ हुई..
महफिल को छोड़ चले घर की ओर, तन्हाई से फिर मुलाकात हुई..
तेरी याद बढ़ गई हर जाम के साथ, भला ये भी कोई बात हुई..