Madhav upadhyay

Dhoka || hindi shayari || sad shayari

दूर हमारी नज़र थी
आँखों के निचे खंजर था… 
और वार करने वाले वो अपने थे
जिनका दिल हमें लगता फूल जैसे सुन्दर था…


Tadapti rooh || sad hindi shayari

Kuch ghav thik ho rhe hai
kuch par marham lgaya ja rha hai
Par kya btaye ye jhakhm to bahar ke hai
andar se to meri rooh ko tadpaya jarha hai💔

कुछ घाव ठीक हो रहे हैं
कुछ पर मरहम लगाया जा रहा है
पर क्या बताएँ ये ज़ख्म तो बाहर के हैं
अंदर से तो मेरी रूह को तड़पाया जा रहा है💔

Madhav upadhyay