उसको भी दर्द है मुझसे बिछुड़ने का ,उसके दोस्त कह रहे थे
अभी कल ही तो देखा उसको बहुत खुश थी दोस्तों संग महफ़िल में
उसको भी दर्द है मुझसे बिछुड़ने का ,उसके दोस्त कह रहे थे
अभी कल ही तो देखा उसको बहुत खुश थी दोस्तों संग महफ़िल में
us shakhsh ka gam bhi koi soche
jise rota hua na dekha ho kisi ne
उस शख्स का ग़म भी कोई सोचे,
जिसे रोता हुआ ना देखा हो किसी ने।
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——