शायरी लिखना उन्होंने शुरू किया,
हमें तो कविताओं का शौक था।
कलाकार वो खुद को कहते थे,
हमे तो उनकी कलाओं का शौक था
Enjoy Every Movement of life!
शायरी लिखना उन्होंने शुरू किया,
हमें तो कविताओं का शौक था।
कलाकार वो खुद को कहते थे,
हमे तो उनकी कलाओं का शौक था
उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...