Udh rahe kabootar shehar me
enhe shant kaun karega
yadi ham shareef ho gaye
to kaandd kaon karega
उड़ रहे कबूतर शहर में,
इन्हे शांत कौन करेगा;
यदि हम शरीफ हो गए,
तो कांड कौन करेगा।
Udh rahe kabootar shehar me
enhe shant kaun karega
yadi ham shareef ho gaye
to kaandd kaon karega
उड़ रहे कबूतर शहर में,
इन्हे शांत कौन करेगा;
यदि हम शरीफ हो गए,
तो कांड कौन करेगा।
apanee saanson mein mahakata paaya hai tujhe,
har khavaab me bulaaya hai tujhe,
kyoo na kare yaad tujh ko,
jab khuda ne hamaare lie banaaya hai tujhe….
अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे,
हर खवाब मे बुलाया है तुझे,
क्यू न करे याद तुझ को,
जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे….
हादसे का क्या भरोसा,
शायद अगले पल होगा,
फिर भी चल रही है धड़कने तो
दिल थाम लेना
शायद ज़िन्दगी में नए इश्तहार अभी बाकी है
सांसों को थमने का इंतजार करना होगा
किसी का वाजिब इंतजार अभी बाकी है
देहलीज़ पर दस्तक देकर
हम दिल हो जाऊ सबसे
बेशक,
मुझसे थोड़ी सांसे अब भी बाकी है...