Enjoy Every Movement of life!
ilm ki ibteda hai dhama
ilm ki inteha hai khamoshi🍂
इल्म की इब्तेदा है धमाका
इल्म की इंतेहा है खामोशी🍂
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
