میں نے اسے چھوڑ دینا مناسب سمجھا
جب دیکھا ہوتے ہوے شرک محبت میں
میں نے اسے چھوڑ دینا مناسب سمجھا
جب دیکھا ہوتے ہوے شرک محبت میں
बेवक्त बेवजह तुझसे बात करना सुकून लाता है
मेरे लड़खड़ाते अल्फ़ाज़ों मे एक जूनून लाता है
मैं रूठ जाऊ जमाने से कोई गीला नहीं
फिर मासूमियत भरा तेरा हाल पूछना याद आता है ,
कभी बिखरू तो आके समेट लेना मुझे
तुम जो रूठे मुझसे तो मुझे सीधा शमशान याद आता है ।
जिंदगी जख्मों से भरी है वक्त को मरहम बनाना सिख लों, हारना तो है ही मौत के सामने पहले जिंदगी से जीना सिख लो।
दुनिया चुप रहती कब हैं,
कहने दो जो कहती है