jab tak na lage bevaphaee kee thokar,
har kisee ko apanee pasand pe naajh hota hai..
जब तक ना लगे बेवफाई की ठोकर,
हर किसी को अपनी पसंद पे नाझ होता है..
jab tak na lage bevaphaee kee thokar,
har kisee ko apanee pasand pe naajh hota hai..
जब तक ना लगे बेवफाई की ठोकर,
हर किसी को अपनी पसंद पे नाझ होता है..
हमने डूबते सूरज की एक शाम को अपना किरदार बदल डाला,
के उस मोहब्बत की चुभन को शायरी का नजमा दे डाला,
लोग मेरी तकरीरों पर वाह वाही दे रहे थे,
भीड़ में कुछ लोग ताली बजाकर, तो कुछ लोग अपनी नाकाम मोहब्बत की दलील दे रहे थे।
महफिल के शोर से एक जानी पहचानी सी आवाज आई,
तू आज भी आगे नहीं बढ़ा की उसने गुहार लगाई,
उसकी इस शिकायत में परवान था पुराने यारो का ।
मै हैरान था कौन था यह शक्स
अनजानों की भीड़ में जिसने मेरे शब्दो में छुपी नाकाम मोहब्बत को पहचाना था,
मुस्कुराता हुआ सामने आया तब समझ आया अरे यह तो यार पुराना था।
Meri SOCH ho TUM………
Mere KHAAB ho TUM……..
Har PAHELI ho TUM……..
Aur har JWAAB bhi TUM……
Per fir bhi kyu NA mere PASS ho TUM.