
sochda haa kinna time rabb ne hai laya tenu
ikk vaari vekha tenu vekhda hi rhaa
teri sohni surat ne mera har gam bhulaya menu

Dukhi shera nu sunda har koi
sukhi sheyar chheti kade sale nahi hunde
je ji kita taa ithe mil lai
suneiaa siviyaa ch kade male nai hunde
ਦੁਖੀ ਸ਼ੇਅਰਾ ਨੂੰ ਸੁਣਦਾ ਹਰ ਕੋਈ
ਸੁਖੀ ਸ਼ਿਅਰ ਛੇਤੀ ਕਦੇ ਸੇਲ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ
ਜੇ ਜੀ ਕੀਤਾ ਤਾਂ ਇੱਥੇ ਮਿਲ ਲੀ
ਸੁਣਿਆ ਸਿਵਿਆ ਚ ਕਦੇ ਮੇਲ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ। akash
अंकुर मिट्टी में सोया था सपने मै खोया था
नन्हा बीज हवा ने लाकर एक जगह बोया था।
तभी बीज ने ली अंगड़ाई देह जरा सी पाई
आंख खोलकर बाहर आया, दुनिया पड़ी दिखाई
खाद्य मिली पानी भी पाया ऐसे जीवन आया
ऊपर बड़ा इधर, धरती में नीचे उधर समाया।
तने डालिया पत्ते आए और फल मुस्कराए
नन्हा बीज वृक्ष बनकर धरती पर लहराए।
जीता मरता रोगी होता दुख आने पर सोता
वृक्ष सांस लेता बढ़ता है जगता है फिर सोता।
रोज शाम को चिड़िया आती सारी रात बिताती
बड़े सवेरे जाग वृक्ष, पर ची ची ची ची गाती।
छाया आती बड़ी सुआती सब टोली झूट जाती
तरह तरह के खेल वर्क्ष के नीचे बैठ रचती।