
Jiwe landi rahi hwa suke pateyaan chon
naina cho ho ke supne unjh langde rahe
ik mileyaa na pyar tera
jo hameshan asin mangde rahe

Jiwe landi rahi hwa suke pateyaan chon
naina cho ho ke supne unjh langde rahe
ik mileyaa na pyar tera
jo hameshan asin mangde rahe
Usda ishq rooh nu rabb milaunda e
Ohnu nazran ch mahan asi rakhange zaroor..!!
Nacheez jahe sanu apnaya e usne
Usde pavitar pyar da ehsan asi rakhange zaroor..!!
Chawan naal paaleya Jo boota mohobbat da
Es mohobbat de naam jind kurbaan asi rakhange zroor..!!
Oh mohobbat lutaunde ne asi zindagi luta rahe haan
Usde kadama ch jahan asi rakhange zroor..!!
Oh kehnde c sanu kite badal Na jayi sajjna
Usde kahe da maan asi rakhange zaroor..!!
Oh Jo kehnde ne tere lyi jionde marde aa
Usdi zindagi layi mehfooz apni jaan rakhange zaroor..!!
Oh kehnde c supna e tere naal jion da
Ohde khayalan ch udaan asi rakhange zaroor..!!
Unj kise v cheez da groor nahi rakhde
Tu sada asi tere eh gumaan asi rakhange zaroor..!!
ਉਸਦਾ ਇਸ਼ਕ ਰੂਹ ਨੂੰ ਰੱਬ ਮਿਲਾਉਂਦਾ ਏ
ਉਸਨੂੰ ਨਜ਼ਰਾਂ ‘ਚ ਮਹਾਨ ਅਸੀਂ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
ਨਾਚੀਜ਼ ਜਿਹੇ ਸਾਨੂੰ ਅਪਣਾਇਆ ਉਸਨੇ
ਉਸਦੇ ਪਵਿੱਤਰ ਪਿਆਰ ਦਾ ਅਹਿਸਾਨ ਅਸੀਂ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
ਚਾਵਾਂ ਨਾਲ ਪਾਲਿਆ ਜੋ ਬੂਟਾ ਮੋਹੁੱਬਤ ਦਾ
ਇਸ ਮੋਹੁੱਬਤ ਦੇ ਨਾਮ ਜ਼ਿੰਦ ਕੁਰਬਾਨ ਅਸੀਂ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
ਉਹ ਮੋਹੁੱਬਤ ਲੁਟਾਉਂਦੇ ਨੇ ਅਸੀਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਲੁਟਾ ਰਹੇ ਹਾਂ
ਉਸਦੇ ਕਦਮਾਂ ‘ਚ ਜਹਾਨ ਅਸੀਂ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
ਉਹ ਕਹਿੰਦੇ ਸੀ ਸਾਨੂੰ ਕਿਤੇ ਬਦਲ ਨਾ ਜਾਈਂ ਸੱਜਣਾ
ਉਸਦੇ ਕਹੇ ਦਾ ਮਾਨ ਅਸੀਂ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
ਓਹ ਜੋ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ ਤੇਰੇ ਲਈ ਜਿਓੰਦੇ ਮਰਦੇ ਹਾਂ
ਉਸਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਲਈ ਮਹਿਫ਼ੂਜ਼ ਆਪਣੀ ਜਾਨ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
ਓਹ ਕਹਿੰਦੇ ਸੀ ਸੁਪਨਾ ਏ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਜੀਉਣ ਦਾ
ਉਸਦੇ ਖਿਆਲਾਂ ‘ਚ ਉਡਾਣ ਅਸੀਂ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
ਉਂਝ ਕਿਸੇ ਵੀ ਚੀਜ਼ ਦਾ ਗਰੂਰ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦੇ
ਤੂੰ ਸਾਡਾ ਅਸੀਂ ਤੇਰੇ..ਇਹ ਗੁਮਾਨ ਅਸੀਂ ਰੱਖਾਂਗੇ ਜ਼ਰੂਰ..!!
एक स्थान पर जीर्णधन नाम का बनिये का लड़का रहता था । धन की खोज में उसने परदेश जाने का विचार किया । उसके घर में विशेष सम्पत्ति तो थी नहीं, केवल एक मन भर भारी लोहे की तराजू थी । उसे एक महाजन के पास धरोहर रखकर वह विदेश चला गया । विदेश स वापिस आने के बाद उसने महाजन से अपनी धरोहर वापिस मांगी । महाजन ने कहा—-“वह लोहे की तराजू तो चूहों ने खा ली ।”
बनिये का लड़का समझ गया कि वह उस तराजू को देना नहीं चाहता । किन्तु अब उपाय कोई नहीं था । कुछ देर सोचकर उसने कहा—“कोई चिन्ता नहीं । चुहों ने खा डाली तो चूहों का दोष है, तुम्हारा नहीं । तुम इसकी चिन्ता न करो ।”
थोड़ी देर बाद उसने महाजन से कहा—-“मित्र ! मैं नदी पर स्नान के लिए जा रहा हूँ । तुम अपने पुत्र धनदेव को मेरे साथ भेज दो, वह भी नहा आयेगा ।”
महाजन बनिये की सज्जनता से बहुत प्रभावित था, इसलिए उसने तत्काल अपने पुत्र को उनके साथ नदी-स्नान के लिए भेज दिया ।
बनिये ने महाजन के पुत्र को वहाँ से कुछ दूर ले जाकर एक गुफा में बन्द कर दिया । गुफा के द्वार पर बड़ी सी शिला रख दी, जिससे वह बचकर भाग न पाये । उसे वहाँ बंद करके जब वह महाजन के घर आया तो महाजन ने पूछा—“मेरा लड़का भी तो तेरे साथ स्नान के लिए गया था, वह कहाँ है ?”
बनिये ने कहा —-“उसे चील उठा कर ले गई है ।”
महाजन —“यह कैसे हो सकता है ? कभी चील भी इतने बड़े बच्चे को उठा कर ले जा सकती है ?”
बनिया—“भले आदमी ! यदि चील बच्चे को उठाकर नहीं ले जा सकती तो चूहे भी मन भर भारी तराजू को नहीं खा सकते । तुझे बच्चा चाहिए तो तराजू निकाल कर दे दे ।”
इसी तरह विवाद करते हुए दोनों राजमहल में पहुँचे । वहाँ न्यायाधिकारी के सामने महाजन ने अपनी दुःख-कथा सुनाते हुए कहा कि, “इस बनिये ने मेरा लड़का चुरा लिया है ।”
धर्माधिकारी ने बनिये से कहा —“इसका लड़का इसे दे दो ।
बनिया बोल—-“महाराज ! उसे तो चील उठा ले गई है ।”
धर्माधिकारी —-“क्या कभी चील भी बच्चे को उठा ले जा सकती है ?”
बनिया —-“प्रभु ! यदि मन भर भारी तराजू को चूहे खा सकते हैं तो चील भी बच्चे को उठाकर ले जा सकती है ।”
धर्माधिकारी के प्रश्न पर बनिये ने अपनी तराजू का सब वृत्तान्त कह सुनाया ।
सीख : जैसे को तैसा