सुना है खूबसूरती की मरम्मत चल रही है,
आईने में देखी जो सूरत तुमसे जीत रही है,
चन्द फूल लगे तुम्हे बेहद संवरने में मगर,
उनकी खुशबू भी तुम्हारे हुस्न से महक रही है...
सुना है खूबसूरती की मरम्मत चल रही है,
आईने में देखी जो सूरत तुमसे जीत रही है,
चन्द फूल लगे तुम्हे बेहद संवरने में मगर,
उनकी खुशबू भी तुम्हारे हुस्न से महक रही है...
Woh khamosh kush is tarah kadar hai
jaise koi intkaam le reha hai
वो खामोश कुछ इस कदर है
जैसे कोई इंतकाम ले रहा हो।।
~रूचिता सिन्हा
कभी लगता है इस जिन्दगी में खुशियां बेशुमार है,
तो कभी लगने लगता है जिन्दगी ही बेकार है।
कभी लगता है लोगो में बहुत प्यार है,
तो कभी लगता है रिश्तों में सिर्फ दरार है ।
कभी लगता है हम भी जिन्दगी जीने के लिए बेकरार है ,
तो कभी कभी लगता है सिर्फ हमे मौत का इंतजार है ।
कभी लगता है हमको भी उनसे प्यार है,
तो कभी लगता है सिर्फ प्यार का बुखार है।
कभी लगता है शायद उनको भी हमसे इजहार है,
फिर लगता है हम दोनों में तो सिर्फ तकरार है ।
कभी लगता है सब अपने ही यार है,
फिर लगता है इनमें भी छिपे गद्दार है ।
कभी लगता है कितना प्यारा संसार है ,
तो कभी लगता है ये संसार बस संसार है ।