

कड़ी धूप हो या हो शीतकाल,
हल चलाकर न होता बेहाल.
रिमझिम करता होगा सवेरा,
इसी आस में न रोकता चाल.
खेती बाड़ी में जुटाता ईमान,
महान पुरूष हैं, है वो किसान.
छोटे-छोटे से बीज बोता,
वही एक बड़ा खेत होता.
जिसकी दरकार होती उसे,
बोकर उसे वह तभी सोता.
खेतो का कण-कण हैं जिसकी जान,
महान पुरूष है, है वो किसान.
तरुण चौधरी
Jo chale gaye yaad baar baar na kareya kar..!!
Ohna mud ke nahi auna intezaar na kareya kar..!!
ਜੋ ਚਲੇ ਗਏ ਯਾਦ ਬਾਰ ਬਾਰ ਨਾ ਕਰਿਆ ਕਰ..!!
ਉਹਨਾਂ ਮੁੜ ਕੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਨਾ ਕਰਿਆ ਕਰ..!!