Laga Kar Aag Seeney Mein Chale Ho Tum Kahan
Abhi To Raakh Udne Do Tamasha Aur Bhi Hoga!
Laga Kar Aag Seeney Mein Chale Ho Tum Kahan
Abhi To Raakh Udne Do Tamasha Aur Bhi Hoga!
Jehrre hasde ne ajh sunn shayari nu
kal bollan mereyaan nu tarsenge
jehrre langhde ne mooh vatt k ajh
shamshaan ch oh mainu labhnge
ਜਿਹੜੇ ਹੱਸਦੇ ਨੇ ਅੱਜ ਸੁਣ ਸ਼ਾਇਰੀ ਨੂੰ
ਕੱਲ ਬੋਲਾਂ ਮੇਰਿਆਂ ਨੂੰ ਤਰਸਣਗੇ
ਜਿਹੜੇ ਲੰਘਦੇ ਨੇ ਮੂੰਹ ਵੱਟ ਕੇ ਅੱਜ
ਸ਼ਮਸ਼ਾਨ ‘ਚ ਉਹ ਮੈਨੂੰ ਲੱਭਣਗੇ
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है