TASKEEN BAN KAR YUN DIL KE MERI
KAR GAYE MUBTALA ULJHAN MAIN HAMAIN
تسکین بن کر یوں دل کے میری
کر گئے مبتلا الجھن میں ہمیں
TASKEEN BAN KAR YUN DIL KE MERI
KAR GAYE MUBTALA ULJHAN MAIN HAMAIN
تسکین بن کر یوں دل کے میری
کر گئے مبتلا الجھن میں ہمیں
इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?
पसंद था जो फूल फिर खिल जाए,
ये जरूरी तो नहीं...
उदासी दूर करने के लिए कोई साथ हो,
ये जरूरी तो नहीं...
जरूरी है कुछ ऐसा करो के,
हर रूह मुस्कुराती रहे...
हर किस्से को मंजिल मिल जाए,
ये जरूरी तो नहीं...