
Par teri akhon hnjhu aun na den..!!
Kadar howe je ohna sache pyar di
Oh tenu kade vi ron na den..!!

👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧
एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।
बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।
ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।
आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।
कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
Tod diye the tune jo mere sare vapis mujhe khuab to de
Teri wafa par uthe hain aaj sawal ab jwaab to de
Yun dekh kar nazre churane se to kuch na hoga
Tere juda hone ke gam mein bitayi hai kitni raatein zara hisaab to de..🙃
तोड़ दिए थे तूने जो मेरे सारे वापिस मुझे मेरे ख्वाब तो दे
तेरी वफा पर उठे है आज सवाल अब जवाब तो दे
यू देख कर नजरे चुराने से तो कुछ न होगा
तेरे जुदा होने के गम में बिताई है कितनी राते जरा हिसाब तो दे..🙃