
Khaure kehra jaadu jeha payi janda e..!!
Loka nu tanhayian ch yaad aundi e
Menu mehfila ch v tera cheta ayi janda e..!!

ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।
Tere lai likhi hai ik shayari
mainu mili kade tainu fer sunawanga
tainu lagda nahi par meri rooh te likhiyaa e na tera
ik din dekhi jaroor tu tere bina me mar jawanga
ਤੇਰੇ ਲਈ ਲਿਖੀ ਹੈ ਇੱਕ ਸ਼ਾਇਰੀ
ਮੈਨੂੰ ਮਿਲ਼ੀ ਕਦੇ ਤੈਨੂੰ ਫੇਰ ਸੁਣਾਵਾਂਗਾ
ਤੈਨੂੰ ਲਗਦਾ ਨਹੀਂ ਪਰ ਮੇਰੀ ਰੂਹ ਤੇ ਲਿਖਿਆ ਏਂ ਨਾ ਤੇਰਾਂ
ਇੱਕ ਦਿਨ ਦੇਖੀਂ ਜ਼ਰੂਰ ਤੂੰ ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਮੈਂ ਮਰ ਜਾਵਾਂਗਾ