तेरे बाद में इश्क नही करता
तू आखरी थी अब मैं किसी पे नही मरता
बोहोत सुना जमाने को मगर
अब मैं लोगो की परवाह नही करता
तेरे बाद में इश्क नही करता
तू आखरी थी अब मैं किसी पे नही मरता
बोहोत सुना जमाने को मगर
अब मैं लोगो की परवाह नही करता
तेरा ईश्क रहता है , मेरे सपनों के शहर में ।
दबी जुबां में मुझसे , एक बात कहता है ।।
मन में बसी है तू , दिल तुझसे मिलने को बेकरार है ।
नाराजगी छोड़ दे ना , तेरा प्यार तो मेरे लहू में बहता है ।।
ख्वाबों की गलियों में , बसी चाहत है सनम ।
फितूरी का खुमार भी , बस तेरा ही नाम कहता है ।।
आँखों में नींद नहीं , सुकून में भी चैन नहीं ।
बस इजहार-ए-मोहब्बत का ख्याल , हर पल मेरे जहन में रहता है ।।
mai usako chaand kah doo ye mumakin to hai,
magar… log use raat bhar dekhen ye mujhe gavaara nahin…
मै उसको चाँद कह दू ये मुमकिन तो है,
मगर… लोग उसे रात भर देखें ये मुझे गवारा नहीं…