तेरे बिन हम जीए भी क्या जीए
तू मिल न जाती अगर प्यार सच्चा होता
अब शक है अपनी मोहाबत पे हमे
बिछड़ते ही मर जाते हो अच्छा होता💔
तेरे बिन हम जीए भी क्या जीए
तू मिल न जाती अगर प्यार सच्चा होता
अब शक है अपनी मोहाबत पे हमे
बिछड़ते ही मर जाते हो अच्छा होता💔
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
