tere hon da mainu koi frak nai
teri yaad hi is shayar
di awwaaz hai
ਤੇਰੇ ਹੋਣ ਦਾ ਮੈਨੂੰ ਕੋਈ ਫ਼ਰਕ ਨਹੀਂ
ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਹੀ ਇਸ ਸ਼ਾਇਰ
ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਹੈ
tere hon da mainu koi frak nai
teri yaad hi is shayar
di awwaaz hai
ਤੇਰੇ ਹੋਣ ਦਾ ਮੈਨੂੰ ਕੋਈ ਫ਼ਰਕ ਨਹੀਂ
ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਹੀ ਇਸ ਸ਼ਾਇਰ
ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਹੈ
हिम्मत भी है ताकत भी ओर हौसला भी
उनकी खुशी के लिए सब कुछ कर जाऊंगा
देखेगी दुनिया भी इस अंजान चेहरे को
जब बाहों में समेटकर में चांद लेकर आऊंगा
मेरी मां के चेहरे पर मुस्कुराहट होगी
और हाथो मेरे लिए में नूर होगा
हवाओं में भी खुशबू होगी और
पापा की नज़रों में गुरूर होगा
सुरूर होगा जब दुनिया अपनी सी लगेगी
जब दुनिया को मेरा भी शउर होगा
अपनी नज़रों में तालाब की आवाम भर लाऊंगा
हर शाम में लौट कर जब घर आऊंगा
हाथों में रोटी पकड़कर कहेगी, बेटा खा ले
मैं मुस्कुराकर दो निवाले उसे भी खिलाऊंगा
खैर, निकल पड़ा हूं अभी मंज़िल ढूंढने खुद ही
इंतेज़ार उस वक्त का है जब मै चांद समेट लाऊंगा...
Bhut hi sasti haan main,
Tu pyaar de do mithe bol bolke taan dekh,
Main wikk jana…