
Sahaan vich jarh layian tere naam diyan..!!

Fauji di tankhah taa sab nu dikhdi aa dikhe na kise nu rona ohna diyaa mawa da
jado chaldi aa udo pata lagda aa naam laina sokha geeta ch raflaa diyaa shaawa da
ਫੌਜੀ di ਤਨਖਾਹ ਤਾਂ ਸਬ ਨੂੰ ਦਿਖਦੀ ਆ ਦਿਖੇ ਨਾ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਰੋਣਾ ਓਨਾ ਦਿਆਂ ਮਾਂਵਾਂ ਦਾ,
ਜਦੋ ਚਲਦੀ ਆ ਓਦੋਂ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਆ ਨਾਮ ਲੈਣਾ ਸੋਖਾ ਗੀਤਾਂ ਚ ਰਫਲਾਂ ਦਿਆਂ ਸ਼ਾਵਾਂ ਦਾ..
✍️anjaan_deep
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।