
Pagl khud nu duniya ch kahauna asi..!!
Asi pyar de pinjre de kaidi haan
Tere samjhi nhio auna asi..!!

Maan liya tha jise khuda se upar,
Na milne par uske shikayat ab khuda se kyu!
मान लिया था जिसे खुदा से भी ऊपर,
न मिलने पर उसके शिकायत अब खुदा से क्यों !
जाने कहाँ बैठकर देखती होगी, वो आज जहां भी रहती है..
नाराज़ है वो किसी बात को लेकर, सपनों में आकर कहती है..
मैं याद नहीं करता अब उसको, चुप-चाप देखकर सहती है..
वो चली गई भले दुनिया से, मेरे ज़हन में अब भी रहती है..
उसे चाहता हूँ पहले की तरह, ये तो वो आज भी कहती है..
किसी और संग मुझे देख-ले गर जो, वो आज भी लड़ती रहती है..
ना वो भूली ना मैं भुला, भले भूल गई दुनिया कहती है..
रहती थी पहले भी पास मेरे, मेरे साथ आज भी रहती है..