Asin la leya e tareyaan naal g
hun saanu teri lodh na
ਅਸੀਂ ਲਾ ਲਿਆ ਏ ਤਾਰਿਆਂ ਨਾਲ ਜੀ
ਹੁਣ ਸਾਨੂੰ ਤੇਰੀ ਲੋੜ ਨਾ
Asin la leya e tareyaan naal g
hun saanu teri lodh na
ਅਸੀਂ ਲਾ ਲਿਆ ਏ ਤਾਰਿਆਂ ਨਾਲ ਜੀ
ਹੁਣ ਸਾਨੂੰ ਤੇਰੀ ਲੋੜ ਨਾ

मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बेचैन,
ठोकरें बहुत है राह में,बीत गए वो दिन रैन,
सोचा ना था यूं सौदा करूंगा,
बूंदों सी बारिश में प्यासा चलूंगा,
पसीने से तर है दामन मेरा
कैसे बायां करूं हाल ए दिल अपना के,
कैसे भीगते हैं मेरे नैन,
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बेचैन,
शाम भी बीत गई, सूरज भी ढल गया,
रास्तों पर निकला तो वक्त भी बदल गया,
ठोकरें बहुत खाई अब थोड़ा संभाल गया,
किससे कहूं फिर भी भीगते हैं मेरे नैन,
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बैचेन,
मेरा हिस्सा था जिनमें कुछ लम्हे चुरा लाया हूं,
हर कदम के साथ कुछ करीब आया हूं,
किनारों पर समेटकर कुछ लेहरें लाया हूं,
दो पल ही सही वापस आए वो दिन रैन,
मै ही हूं वो मुसाफिर, मै ही था बेचैन…