दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
वीराँ है मैकदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास है
तुम क्या गये के रूठ गये दिन बहार के
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हमने हौसले परवर-दिगार के
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
भूले से मुस्कुरा तो दिये थे वो आज ‘फ़ैज़’
मत पूछ वलवले दिलए-ना-कर्दाकार के
Jhuthi duniyan taan sufna e dil nu mein dass ke..!!
Ishq kitta rabba mereya mein tere naal hass ke..!!
ਝੂਠੀ ਦੁਨੀਆਂ ਤਾਂ ਸੁਫ਼ਨਾ ਏ ਦਿਲ ਨੂੰ ਮੈਂ ਦੱਸ ਕੇ..!!
ਇਸ਼ਕ ਕੀਤਾ ਰੱਬਾ ਮੇਰਿਆ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਹੱਸ ਕੇ..!!