अब ना होगा तेरा साथ जिंदगी भर , रहेगा बस यही एक मलाल जिंदगी भर ।
मेरी हसरतें तेरी खुशियों में कहीं गुम हो गई , हम तलाशते रह गए जीने की वजह जिंदगी भर ।।
हाशिए पर है अब मेरे ख्वाबों की हकीकत , ख्याल भी तेरा रहा ताउम्र जिंदगी भर ।
पूछता रहा सवाल कि क्यों खुद से रूठे हैं , असर तेरी मोहब्बत का जख्म बना रहा जिंदगी भर ।।
मैं मुकम्मल होके भी अधूरा ही रहा हु ,
तमाम आजमइशों के बाद भी अकेला ही रहा हु ।
मैं हर बार करता रहा जिसकी हसी की दुआ
बदले मे इसके हर बार रोता रहा हूँ ।
हर बार बेवजह रूठता है कोई मुझसे
लाख कोशिशों के बाद भी खुद को खोटा रहा हूँ ।
मेरी कोशीशे मिटा रही है तमाम जख्मो को मेरे ,
दूसरी तरफ जज़बातो की आड़ मे एनहे खुरेद रहा हूँ ।