
Rahiye tere Bina pal pal marde..!!
Dil e tadapda jaan jandi e
Tenu ki pta asi tera kinna karde..!!

Kyu ninde eh preetan
Je salahuniya nahi aundiyan..!!
Tu shad ehna da khehra
tenu chahuniyan nahi aundiyan..!!
Na la laare je akhan ch akhan
Pauniyan nahi aundiyan..!!
Khayia na kar kasma
je nibhauniyan nahi aundiyan..!!
ਕਿਉਂ ਨਿੰਦੇ ਇਹ ਪ੍ਰੀਤਾਂ
ਜੇ ਸਲਾਹੁਣੀਆਂ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀਆਂ..!!
ਤੂੰ ਛੱਡ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਖਹਿੜਾ
ਤੈਨੂੰ ਚਾਹੁਣੀਆਂ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀਆਂ..!!
ਨਾ ਲਾ ਲਾਰੇ ਜੇ ਅੱਖਾਂ ‘ਚ ਅੱਖਾਂ
ਪਾਉਣੀਆਂ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀਆਂ..!!
ਖਾਇਆ ਨਾ ਕਰ ਕਸਮਾਂ
ਜੇ ਨਿਭਾਉਣੀਆਂ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀਆਂ..!!
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”