थोड़ा मुस्कुरा दे ए काफ़िर,
के कयामत बीत गई,
मायूसी तो रहेगी ही चेहरे पर,
फिर आशियाना बसाते बसाते...
Enjoy Every Movement of life!
थोड़ा मुस्कुरा दे ए काफ़िर,
के कयामत बीत गई,
मायूसी तो रहेगी ही चेहरे पर,
फिर आशियाना बसाते बसाते...
Dastak aur aawaz to kaano ke liye hai
Jo rooh ko sunayi de use khamoshi kehte hain..💯
दस्तक और आवाज तो कानों के लिए है,,
जो रुह को सुनाई दे उसे खामोशी कहते हैं…💯
बिखरे हुए है पन्नें मेरे
खुद को किताबों की तरह सहेजना चाहती हूँ ❣️