थोड़ा मुस्कुरा दे ए काफ़िर,
के कयामत बीत गई,
मायूसी तो रहेगी ही चेहरे पर,
फिर आशियाना बसाते बसाते...
Enjoy Every Movement of life!
थोड़ा मुस्कुरा दे ए काफ़िर,
के कयामत बीत गई,
मायूसी तो रहेगी ही चेहरे पर,
फिर आशियाना बसाते बसाते...

आसान होगा शायद तुम्हारे लिए ये कहना,
प्यार की डोर में तुम्हें नहीं है बंधना,
हाल दरें हाल बेहाल इस दिल का हो रहा,
जो एक मुलाकात में तुम्हें अपना कह रहा ||