थोड़ा मुस्कुरा दे ए काफ़िर,
के कयामत बीत गई,
मायूसी तो रहेगी ही चेहरे पर,
फिर आशियाना बसाते बसाते...
Enjoy Every Movement of life!
थोड़ा मुस्कुरा दे ए काफ़िर,
के कयामत बीत गई,
मायूसी तो रहेगी ही चेहरे पर,
फिर आशियाना बसाते बसाते...
Hauslon ki udaan se khud ko buland kar itna
Aaftaab mein chamak hai jitna 🤞✨
हौसलों की उड़ान से खुद को बुलंद कर इतना
आफताब में चमक है जितना 🤞✨
