
fir kisi apne ka dil todhna nahi chahta
kyuki unhe mera baat samajh nahi aata..
meri bas itni galti hai ki mujhe jhooth kehna nahi aata

zindagi hai badi matlabi,.
Na hame Darr tha, na pyaar,
Phir bhi hum jee rahe aise the
Ke logon ka nazariya hi badal gaya
hame dekh kar………..
शाम बीती और रात हुई, गमों की फिर बरसात हुई..
तुझे भुलने को फिर से जाम पिया, गलती फिर मेरे हाथ हुई..
फिर से बहक गए लफ्ज मेरे, लफ्जों पे फिर से दात हुई..
दिलजले थे वहां कई मुझ जैसे, उनकी भी इश्क में मात हुई..
वही एक तरह का हर किस्सा, इश्क की भी भला कोई जात हुई..
हर कहानी ख़ुशी से शुरू हुई, ख़तम आंसुओं के साथ हुई..
महफिल को छोड़ चले घर की ओर, तन्हाई से फिर मुलाकात हुई..
तेरी याद बढ़ गई हर जाम के साथ, भला ये भी कोई बात हुई..