Gam asa nahio laina lai tethon vi nahi hona
Reh asi nahio sakde reh tethon vi nahi hona..!!
ਗਮ ਅਸਾਂ ਨਹੀਂਓ ਲੈਣਾ ਲੈ ਤੈਥੋਂ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ
ਰਹਿ ਅਸੀਂ ਨਹੀਂਓ ਸਕਦੇ ਰਹਿ ਤੈਥੋਂ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ..!!
Gam asa nahio laina lai tethon vi nahi hona
Reh asi nahio sakde reh tethon vi nahi hona..!!
ਗਮ ਅਸਾਂ ਨਹੀਂਓ ਲੈਣਾ ਲੈ ਤੈਥੋਂ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ
ਰਹਿ ਅਸੀਂ ਨਹੀਂਓ ਸਕਦੇ ਰਹਿ ਤੈਥੋਂ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ..!!
Sote sote jag jati hu jagte jagte so jati hoon
Fir yaad tumhari aati hai meethe sapno mein kho jati hoon
Apna milna is jeevan mein shayad ab namumkin hai
Khwabon mein hi sahi magar kuch pal ko tumhari ho jati hoon..!!
सोते सोते जग जाती हूँ जगते जगते सो जाती हूँ!
फिर याद तुम्हारी आती है मीठे सपनों मे खो जाती हूँ!
अपना मिलना इस जीवन मे शायद अब नामुमकिन है!
ख्वाबों मे ही सही मगर कुछ पल को तुम्हारी हो जाती हूँ!!
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।