
oh jadon desh partange apne kadi
kujh taan sekenge maa de sive di agan
baki kabraan de rukh heth ja behange

तेरी हंसी मुरझाऐ फुलों को भी फिर से खिला दे,
जब झपकाऐ तु पलकें तो ,सुरज को भी ग्रहण लगा दे,
चाल तेरी ऐसी जैसे लहराती हो पीपल की डाल कोई,
और जब खुली हों तेरी जुल्फें तो काली घटा झा जाऐ!
बोल तेरे ऐसे जैसे जलेबी से चासनी टपक जाऐ,
क्या लिखुं तेरी खुबसुरती को तु है गणित का सवाल कोई!
Hamari bhi kuchh kimat hai janab
jaroori nahi
ki har toseef ka lafaz aapke liye hi ho
ਹਮਾਰੀ ਭੀ ਕੁਛ ਕੀਮਤ ਹੈ ਜਨਾਬ,
ਜਰੂਰੀ ਨਹੀਂ
ਕਿ ਹਰ ਤੌਸੀਫ ਕਾ ਲਫਜ਼ ਆਪਕੇ ਲੀਏ ਹੀ ਹੋ….👀 ….Aman❤