हो विष्णु तुम धरा के,
हल सुदर्शन तुम्हारा !!
बिना शेष-शैया के ही,
होता दर्शन तुम्हारा !!
पत्थर को पूजने वाले,
क्या समझेंगे मोल तेरा !!
माँ भारती के ज्येष्ठ सुत,
तुमको नमन हमारा !!!
तरुण चौधरी
हो विष्णु तुम धरा के,
हल सुदर्शन तुम्हारा !!
बिना शेष-शैया के ही,
होता दर्शन तुम्हारा !!
पत्थर को पूजने वाले,
क्या समझेंगे मोल तेरा !!
माँ भारती के ज्येष्ठ सुत,
तुमको नमन हमारा !!!
तरुण चौधरी
Vo mera kon hai maloom nhi hai lekin
Jab bhi milta hai pehlu mein jgah deta hai🥰
वो मेरा कौन है मालूम नहीं है लेकिन,
जब भी मिलता है तो पहलू में जगा देता है।🥰
तेरी आंखों में छिपे ख्वाब पूरे करने हैं,
तेरे दिल के जज़्बात पूरे करने हैं,
तेरे होठों की हसीं को यूं ही बरकरार रखना है,
तेरी ख्वाइशों को पलकों पर सजना है,
होने नहीं देनी आंखे तेरी नम,
तेरे कदमों को फलक तक ले जाना है ,
अभी तो तुझे बहुत चाहना है।।