ਕਿੰਨਾ ਨਿੱਕਾ ਜਿਹਾ ਸ਼ਬਦ ਏ ਨਾ ਉਡੀਕ ਪਰ ਕਰਦਿਆਂ ਉਮਰਾਂ ਬੀਤ ਜਾਂਦੀਆਂ ਨੇ 💯😊
Kinna Nika jeha sbad aa na udik par krdia umra bitt jandya ne💯😊
ਕਿੰਨਾ ਨਿੱਕਾ ਜਿਹਾ ਸ਼ਬਦ ਏ ਨਾ ਉਡੀਕ ਪਰ ਕਰਦਿਆਂ ਉਮਰਾਂ ਬੀਤ ਜਾਂਦੀਆਂ ਨੇ 💯😊
Kinna Nika jeha sbad aa na udik par krdia umra bitt jandya ne💯😊
When ever you hear someone reading lines which I wrote once, I hope it reminds you of me.
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी