ਕਿੰਨਾ ਨਿੱਕਾ ਜਿਹਾ ਸ਼ਬਦ ਏ ਨਾ ਉਡੀਕ ਪਰ ਕਰਦਿਆਂ ਉਮਰਾਂ ਬੀਤ ਜਾਂਦੀਆਂ ਨੇ 💯😊
Kinna Nika jeha sbad aa na udik par krdia umra bitt jandya ne💯😊
ਕਿੰਨਾ ਨਿੱਕਾ ਜਿਹਾ ਸ਼ਬਦ ਏ ਨਾ ਉਡੀਕ ਪਰ ਕਰਦਿਆਂ ਉਮਰਾਂ ਬੀਤ ਜਾਂਦੀਆਂ ਨੇ 💯😊
Kinna Nika jeha sbad aa na udik par krdia umra bitt jandya ne💯😊
अब कौन रोज़ रोज़ ख़ुदा ढूंढे,
जिसको न मिले वही ढूंढे ..
रात आयी है, सुबह भी होगी,
आधी रात में कौन सुबह ढूंढे..
जिंदगी है जी खोल कर जियो,
रोज़ रोज़ क्यों जीने की वजह ढूंढ़े..
चलते फिरते पत्थरों के शहर में,
पत्थर खुद पत्थरों में भगवान ढूंढ़े..
धरती को जन्नत बनाना है अगर,
हर शख्स खुद में पहले इंसान ढूंढे…!!!
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी