ना कोई गुनाह किया , ना कोई मुकदमा हुआ..!
ना अदालत सजाई गई, ना कोई दलिले हुई..!
किस किस से मांगे हम गवाही वफ़ा कि !
उसने छोड़ा भरे बाज़ार हमे, ये ज़माना जानता है!
ना कोई गुनाह किया , ना कोई मुकदमा हुआ..!
ना अदालत सजाई गई, ना कोई दलिले हुई..!
किस किस से मांगे हम गवाही वफ़ा कि !
उसने छोड़ा भरे बाज़ार हमे, ये ज़माना जानता है!
Shayari mein apna dard talash kroge to bta nhi payegi…
Usmein gam auro ka likha hai, tumhara jta nhi payegi…
Apne gam aur khushi ko panne pe utarna sikh lo..
Ye mera tazurba kehta hai, tumhe koi takleef staa nhi payegi…
शायरी में अपना दर्द तलाश करोगे तो बता नहीं पायेगी..
उसमे गम ओरों का लिखा है, तुम्हारा जता नहीं पायेगी..
अपने गम और खुशी को पन्ने पे उतारना सीख लो..
ये मेरा तजुर्बा कहता है, तुम्हे कोई तकलीफ सता नहीं पायेगी.
Na kiya kar mujhse shikayat aye zindagi,
Ek tu hi to hai Jo mujhe apni lagti hai🙃…..!!!
न किया कर मुझसे शिकायत ए ज़िन्दगी
एक तू ही तो है जो मुझे अपनी लगती ह🙃ै…..!!!