Tumhe lagta tha ki me jaanta kush bhi nahi
mujhe pata tha ki raasta badal rahe ho tum
तुम्हें लगता था की मैं जानता कुछ भी नहीं,
मुझे पता था की रास्ता बदल रहे हो तुम।
आदमी को बताना आता हैं, इसलिए वो बोलते हैं।
सिर्फ अपना चिंता में ध्यान दो, कुत्ते भी तो भौंकते हैं।
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क्या लिखू, दिमाग में कुछ नहीं आ रहा है।
सोचना में भी लॉकडाउन, जीवन स्थिर है।
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दुनिया का सबसे छोटा चीज़, सबसे भयंकर।
इंसान का बड़ा दिमाग भी दिख नहीं पाते उसका रूप और आकार।
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पढ़ालिखा इंसान जब बैठे रहते है, तब लगता है शेर को किसी ने चिड़ियाघर में पकड़ के रखा है।
उसे जब नौकरी मिलता है तो लगता है ओलिंपिक में कोई शूटर पदक जीत के आ रहा है।
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गर्मी में जब पसीना निकलता है, मैं बिना पानी से नहा लेता हु।
बिना कारन में जब मुसीबत आता है, मैं कोई अपराध न करके भी फँस जाता हु।
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डॉक्टर समाज का स्नायु है।
उनको जीने दो, अगर अपना जिंदगी का स्पन्दन को महसूस करना है।
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इंसान का जो छाया है, वो भुत।
जब इंसान नहीं रहेगा, वो भी भागेगा खुद।
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भुत कभी भुत के साथ टकराता नहीं, लेकिन नेता टकराता है नेता के साथ।
भावना रहते है सोच में, लेकिन बाहर आता है सिर्फ बात।
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दुनिया की सबसे बड़ा घातक है गुस्सा।
ध्यान आभ्यास करो, नहीं तो अपना जिंदगी लेंगे अपने से हिस्सा।