
sachi bda peh reha hol mittra
bahut kha liya maa diya jhidka
hun kithe milna eh mahol mittra

नफ़रत का भाव ज्यों ज्यों खोता चला गया, मैं रफ्ता रफ्ता आदमी होता चला गया। फिर हो गया प्यार की गंगा से तर बतर, गुजरा जिधर से सबको भिगोता चला गया। सोचा हमेशा मुझसे किसी का बुरा न हो, नेकी हुई तो दरिया में डुबोता चला गया। कटुता की सुई लेके खड़े थे जो मेरे मीत, सद्भावना के फूल पिरोता चला गया। जितना सुना था उतना जमाना बुरा नहीं, विश्वास अपने आप पर होता चला गया। अपने से ही बनती है बिगड़ती है ये दुनियां, मैं अपने मन के मैल को धोता चला गया। उपजाऊ दिल है बेहद मेरे शहर के लोग, हर दिल में बीज प्यार का बोता चला गया।...
Putaa wang khidaeyaa
chawaa naal padhaeyaa mainu
jado dubaara janam mile
tere ghar da jee howa
har janam ch baapu tu howe
me teri lado dhee howa
ਪੁੱਤਾਂ ਵਾਂਗ ਖਿਡਾਇਆ
ਚਾਵਾਂ ਨਾਲ ਪੜਾਇਆ ਮੈਨੂੰ
ਜਦੋਂ ਦੁਬਾਰਾ ਜਨਮ ਮਿਲੇ
ਤੇਰੇ ਘਰ ਦਾ ਜੀਅ ਹੋਵਾਂ
ਹਰ ਜਨਮ ਚ ਬਾਪੂ ਤੂੰ ਹੋਵੇ
ਮੈਂ ਤੇਰੀ ਲਾਡੋ ਧੀ ਹੋਵਾ..!!!