
sachi bda peh reha hol mittra
bahut kha liya maa diya jhidka
hun kithe milna eh mahol mittra

Yun fasle na badha marz aur ilaz ke bich
Mai kahi mar na jau kal aur aaj ke bich🍁
यूँ फ़ासले न बढ़ा मर्ज और इलाज के बीच
मैं कहीं मर न जाऊं कल और आज के बीच🍁
कुछ अधूरे ख़्वाब जगा जाते हो,
मायूस चेहरे की मुस्कान जगा जाते हो...
सुबह पहली किरण भी तुम्हारी सादगी देखने आती है,
सांझ की रौशनी तुम्हारी जुल्फों में खो जाती है...
हवाएं तुमसे खुशबू लेकर चल रही हैं,
वो तितलियां भी तुम्हारे लबों सी खिल रही है...
कैसे बताऊं तुम्हे जैसे तुम इक किस्सा हो,
मेरी ज़िन्दगी हो मेरा इक हिस्सा हो...