bahut andar tak tabaahee macha deta hai,
vo ashk jo aankh se bah nahin paata..
बहुत अंदर तक तबाही मचा देता है,
वो अश्क जो आँख से बह नहीं पाता..
bahut andar tak tabaahee macha deta hai,
vo ashk jo aankh se bah nahin paata..
बहुत अंदर तक तबाही मचा देता है,
वो अश्क जो आँख से बह नहीं पाता..
Tere naal bitaya sma chete jad vi aunda hai
Socha de vich pa dinda te dil nu bhut rawaunda hai..😓
ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਬਿਤਾਇਆ ਸਮਾਂ ਚੇਤੇ ਜਦ ਵੀ ਆਂਉਦਾ ਹੈ
ਸੋਚਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦਿੰਦਾ ਤੇ ਦਿਲ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਰਵਾਂਉਦਾ ਹੈ..😓
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है