bahut andar tak tabaahee macha deta hai,
vo ashk jo aankh se bah nahin paata..
बहुत अंदर तक तबाही मचा देता है,
वो अश्क जो आँख से बह नहीं पाता..
bahut andar tak tabaahee macha deta hai,
vo ashk jo aankh se bah nahin paata..
बहुत अंदर तक तबाही मचा देता है,
वो अश्क जो आँख से बह नहीं पाता..
जदो दी फड़ी ओहने
मेरी कलाई
मै अपना आप
गवा आयी हाँ
टूट गयी मेरी
कंच दी वंग
पर मैं फेर
भी हथ छुड़ा
आयी हाँ
भज दी दी
मेरी खुल गई
पज़ेब
मै निशानी बाज
ओनु फड़ा
आयी हाँ
जालिम किता
जादू ऐसा
मैं दिल अपना
ओहदे ते लुटा
आयी हा
मैं इश्के दी पींग
चढ़ा आयी हां
मैं इश्के दी पींग
चढ़ा आयी हाँ..हर्ष✍️
