वक़्त तो अब लफ़्ज़ों में दिया जाता है,
रूबरू तो महज दिखावा किया जाता है
waqt to ab lafzo me diya jaata hai
roobroo to meha dikhawa kiya jaata hai
वक़्त तो अब लफ़्ज़ों में दिया जाता है,
रूबरू तो महज दिखावा किया जाता है
waqt to ab lafzo me diya jaata hai
roobroo to meha dikhawa kiya jaata hai
सुना है लोग तुझे आँखें भरकर देखते हैं , है मन में क्या उनके ये तो सवाल कर ।
माना लोगों की फितरत अब अच्छी नहीं , अपनी इज्जत का तू तो ज़रा ख्याल कर ।।
बादस्तूर चलती रही नाराजगी जिंदगी में , वक्त बेवक्त काफिर सा न मेरा हाल कर ।
मेरी आदतों में शूमार है तेरी मोहब्बत का सबब , खुदा का शुक्र मना बेवजह न मलाल कर ।।
बागी मिजाज़ रहा दिल का चाहतों के गुबार में , जिससे कभी मोहब्बत थी उससे अब नफरत भी बेमिसाल कर ।
क्या हुआ जो दुआ भी कुबूल न हुई , हासिल कर अपने दर्द को कुछ तो अब बवाल कर ।।
Hnjuyan de bina kuj ditta hi nhi..
Eho umeed c menu tere ton zindriye..!!
Ikk ohi mera apna c es duniya ch..
Tu oh v kho leya kyu mere ton zindriye..!!
ਹੰਝੂਆਂ ਦੇ ਬਿਨਾਂ ਕੁਝ ਦਿੱਤਾ ਹੀ ਨਹੀਂ..
ਇਹੋ ਉਮੀਦ ਸੀ ਮੈਨੂੰ ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਜਿੰਦੜੀਏ..!!
ਇੱਕ ਓਹੀ ਮੇਰਾ ਆਪਣਾ ਸੀ ਇਸ ਦੁਨੀਆਂ ‘ਚ..
ਤੂੰ ਉਹ ਵੀ ਖੋਹ ਲਿਆ ਕਿਉਂ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਜਿੰਦੜੀਏ..!!