वक़्त तो अब लफ़्ज़ों में दिया जाता है,
रूबरू तो महज दिखावा किया जाता है
waqt to ab lafzo me diya jaata hai
roobroo to meha dikhawa kiya jaata hai
वक़्त तो अब लफ़्ज़ों में दिया जाता है,
रूबरू तो महज दिखावा किया जाता है
waqt to ab lafzo me diya jaata hai
roobroo to meha dikhawa kiya jaata hai
वो बाहों में मुझे लेके,,,
शादी किसी और से रचाना चाहता है,,,
वो हम बिस्तर तो होता है,,,
हमसफर किसी और को बनाना चाहता है,,,
वो वक्त काटता मेरे साथ है,,,
वक्त बिताना किसी और के साथ चाहता है,,,
वो मुस्कुराता मेरे साथ है,,,
वो मुस्कान किसी और का बनना चाहता है,,,
वो हाथ थामे तो मेरा चलता है,,,
वो जिंदगी का सफर किसी और के साथ चलना चाहता है,,,
वो बाहों में मुझे लेके,,,
शादी किसी और से रचाना चाहता है….।।
