वो हक हक की बात करके हकीकत से काफी दूर हो गए । उन्हें क्या मालूम था कि जिस हक की वो बात कर रहे हैं उस हक पर उनके अलावा किसी का हक जताने का भी हक नही है। ❤️
वो हक हक की बात करके हकीकत से काफी दूर हो गए । उन्हें क्या मालूम था कि जिस हक की वो बात कर रहे हैं उस हक पर उनके अलावा किसी का हक जताने का भी हक नही है। ❤️
देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,
अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने,
क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,
यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने।
तेरे नीले नीले नैनो ने किया था काला जादू मुझ पर,
यूं ही तो नहीं खो दिया था करार मैंने।
कायदा इश्क जब से पड़ा है,
इल्म बस इतना बचा है मुझ में,
फकत नाम तेरा मैं लिख लेता हूं, पढ़ लेता हूं।
आग बरसे चारों तरफ इस जमाने के लिए,
मेरी आंखों की नमी में हो पनाह किसी को छिपाने के लिए।
वो है खुदगर्ज बड़ी मैं जानता हूं,
लौट आएगी फिर से खुद को बचाने के लिए।
मिजाज हो गए तल्ख जब मतलब निकल गया,
ना हुई दुआ कबूल तो मजहब बदल गया।
वो जो कहते थे कि मेरी चाहत कि खुदा तुम हो,
कभी बदली उनकी चाहत कभी खुदा बदल गया।
चल मान लिया कोई तुझसे प्यारी नहीं होगी,
पर शर्त लगा लो तुम से भी वफादारी नहीं होगी।
तेरी बेवफाई ने मेरा इलाज कर दिया है,
पक्का अब हमें फिर से इश्क की बीमारी नहीं होगी।
प्यार जब भी हुआ तुमसे ही हुआ,
कोशिश बहुत की मैंने किसी और को चाहने की।
एक तो तेरा इश्क था ही और एक मैंने आ पकड़ा,
अब कोई कोशिश भी ना करना मुझ को बचाने की।
यह जो आज हम उजड़े उजड़े फिरते हैं,
हसरतें बहुत थी हमें भी दुनिया बसाने की।
मुझे आज भी तुमसे कोई गिला नहीं है,
दस्तूर ही कहां बचा है मोहब्बत निभाने का।
इस शहर में मुर्दों की तादाद बहुत है,
कौन कहता है कि ये आबाद बहुत है,
जुल्मों के खिलाफ यहां कोई नहीं बोलता,
बाद में करते सभी बात बहुत हैं।
मेरे छोटे से इस दिल में जज्बात बहुत हैं,
नींद नहीं है आंखों में ख्वाबों की बरसात बहुत है।
राह नहीं, मंजिल नहीं, पैर नहीं कुछ भी नहीं,
मुझे चलने के लिए तेरा साथ बहुत है।
दूर होकर भी तू मेरे पास बहुत है,
सगा तो नहीं मेरी पर तू खास बहुत है।
जिनकी टूट चुकी उनको छोड़ो बस,
हमें तो आज भी उनसे आस बहुत है।
Gali gali vich aashiq dinde ne gedhe,
Sochde ne eh nhi te ehdi saheli hi hath lagje mere
Jisma cho kadd apna matlab mudke dinde nhi nede
Pyar kareyo taan j hon dard sehan de jere
Kyunki dilon chahun wale ghat milde jisma de chor bathere…🙌
ਗਲੀ ਗਲੀ ਵਿੱਚ ਆਸ਼ਿਕ ਦਿੰਦੇ ਨੇ ਗੇੜੇ,
ਸੋਚਦੇ ਨੇ ਇਹ ਨੀ ਤੇ ਇਹਦੀ ਸਹੇਲੀ ਈ ਹੱਥ ਲਗਜੇ ਮੇਰੇ।
ਜਿਸਮਾਂ ਚੋ ਕੱਢ ਆਪਣਾ ਮੱਤਲਬ ਮੁੜਕੇ ਦਿੰਦੇ ਨੀ ਨੇੜੇ,
ਪਿਆਰ ਕਰਿਓ ਤਾਂ ਜ ਹੋਣ ਦਰਦ ਸਹਿਣ ਦੇ ਜੇਰ੍ਹੇ।
ਕਿਓਕਿ ਦਿੱਲੋ ਚਾਹੁਣ ਵਾਲੇ ਘੱਟ ਮਿਲਦੇ ਜਿਸਮਾਂ ਦੇ ਚੋਰ ਬਥੇਰੇ…🙌