Woh khamosh kush is tarah kadar hai
jaise koi intkaam le reha hai
वो खामोश कुछ इस कदर है
जैसे कोई इंतकाम ले रहा हो।।
~रूचिता सिन्हा
Woh khamosh kush is tarah kadar hai
jaise koi intkaam le reha hai
वो खामोश कुछ इस कदर है
जैसे कोई इंतकाम ले रहा हो।।
~रूचिता सिन्हा
Jinna dina ‘ch me apne aap nu khushnasib samajhda c
ajh ohi dina de ujale
meri zindagi de hanereyaan de kaaran bane
ਜਿੰਨਾ ਦਿਨਾਂ ‘ਚ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਖੁਸ਼ਨਸੀਬ ਮੰਨਦਾ ਸੀ
ਅੱਜ ਓਹੀ ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਉਜਾਲੇ
ਮੇਰੀ ਜਿੰਦਗੀ ਦੇ ਹਨੇਰਿਆਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਬਣੇ
मेरी ज़िन्दगी के जो पल तूने छीने है
याद रखना तुझको भी वही जीने है।।
लेना देना रस्मे नाते ये चलेंगे जीवनभर
पर तेरे लिए प्यार ना बचा अब रत्तीभर।।
अपने हर पल को जीया मेरे से पहले तूने
बारी मेरी आयी तो दिया प्यार का जहर तूने।।
समझ मुझे अब आने लगा है खेल तेरा
जरूरत को तूने अपनी बताया प्यार मेरा।।
मेरी मासूमियत का ये जो फायदा उठाया है
भोली सी ‘गुड़िया’ को प्यार में जलाया है।।
सच्चा प्यार था तेरा तो बचा अब कुछ क्यो नही
एक दिल की आह को दिल से लगाया क्यो नही।।
दिल मेरा आज जो ये रोता है ना
सब्र का एक घुट रोज पीता है ना।।
बदल जाएगी अब ये जिंदगी भी मेरी
जहां अब जगह ना होगी इसमे तेरी।।।