Woh khamosh kush is tarah kadar hai
jaise koi intkaam le reha hai
वो खामोश कुछ इस कदर है
जैसे कोई इंतकाम ले रहा हो।।
~रूचिता सिन्हा
Woh khamosh kush is tarah kadar hai
jaise koi intkaam le reha hai
वो खामोश कुछ इस कदर है
जैसे कोई इंतकाम ले रहा हो।।
~रूचिता सिन्हा
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
Kitho talaash karega ve mere wargi
jo teri judai v sahe te pyaar v kare
ਕਿੱਥੋ ਤਲਾਸ਼ ਕਰੇੇਗਾ ਵੇ ਮੇਰੇ ਵਰਗੀ
ਜੋ ਤੇਰੀ ਜੁਦਾਈ ਵੀ ਸਹੇ ਤੇ ਪਿਆਰ❤️ ਵੀ ਕਰੇ